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गुरुवार, 3 मार्च 2016

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सांप की कीमत है करोड़ों में, क्यों बिकते हैं इतने महंगे


वन विभाग ने पीथमपुर के डाक बंगले के पास एक व्यक्ति से लुप्त प्रजाति का डेढ़ मीटर लंबा दो मुंहा सांप (रेड्स एन बोआ) जब्त किया हैै। आरोपी ने इसकी कीमत 25 लाख रुपए रखी थी। सौदेबाजी होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार कर उससे सांप जब्त कर लिया। >अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों में ... >25 लाख रुपए रखी थी कीमत डिप्टी रेंजर पवन जोशी ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी विनोद कल्याणे दो मुंहा सांप बेचने की कोशिश में लगा है। इस पर उससे ग्राहक के रूप में संपर्क किया गया। पहले आरोपी ने 25 लाख रुपए कीमत लगाई। तीन दिन तक उससे सौदेबाजी चलती रही। अंत में वह सात लाख रुपए में बेचने में राजी हो गया। आरोपी ने पीथमपुर के डाक बंगले के पास लेनदेन की बात कही। इस पर डिप्टी रेंजर जोशी वन रक्षक आशीष कुशवाह व लीलाकृष्ण शर्मा मौके पर पहुंचे। जैसे ही आरोपी सांप लेकर पहुंचा उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया उसे यह सांप महूगांव निवासी किसी मंडलोई दादा ने दिया था। वनाधिकारियों की अभी मंडलोई से बात नहीं हुई। इस संबंध में जांच जारी है। >यह है विशेषता - यह लुप्तप्राय: जाति का है। इसकी अधिकतम लंबाई डेढ़मीटर और वजन छह किलो होता है। - हिंदी में इसे चकलोन (दो मुंहा सांप) कहा जाता है। - रेत में पाए जाने वाले इस सांप की चीन में ज्यादा मांग है। - इसकी नसों में एक केमिकल होता है, जिससे सेक्स, कोमा एवं अन्य कई बीमारियों की दवाइयां बनाई जाती है। - कई लोग इसका उपयोग गढ़ा धन निकालने, तांत्रिक क्रिया में भी करते हैं। - इसके दोनों मुहं छह-छह माह तक सक्रिय रहते हैं। - अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4 करोड़ रु. तक है। >अरब देशों में खासी मांग... सांपों की तस्करी का यह रैकेट मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के बीच ऑपरेट किया जाता है। धार-झाबुआ से तस्कर दो मुंहे सांप लेकर उन्हें उत्तरप्रदेश या हरियाणा पहुंचाते हैं, यहां से इन सांपों को या तो जिंदा या फिर इनके शरीर के अलग-अलग हिस्से अरब देशों को भेजे जाते हैं। इन सांपों की बिक्री वजन के हिसाब से होती है। बीते वर्षों में इन सांपों की तस्करी के संबंध में पुलिस ने कई गिरोह का पर्दाफाश किया है। >अस्तित्व खतरे में... डॉ. प्रशांत तिवारी के अनुसार मध्यप्रदेश के धार-झाबुआ और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजाति का यह सांप पाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सांप की करोड़ों में है। अंधविश्वास के चलते कई लोग तंत्र-मंत्र के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं और इसका उपयोग सेक्स पावर बढ़ाने की दवाइयों में भी किया जा रहा है। यही कारण है कि इस प्रजाति का अस्तित्व खतरे में है।
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