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शनिवार, 12 सितंबर 2015

Dedicated to all ENGINEERS

एक बेराजगार इंजीनियर 👷काफी दिनों से नौकरी तलाश रहा था, पर नौकरी उस लड़की की तरह व्यवहार कर रही थी जो क्लास के सभी लड़को को डेट कर चुकी थी लेकिन सिर्फ उसी से कतरा रही थी। उसके साथ के सारे mba, mca जॉब पर लग चुके थे लेकिन उसे हर जगह से ठुकराया जा चुका था। माँ👵 बाप 👴ने भी जेब खर्च देना बंद कर दिया था और गर्लफ्रेंड👩 तो किसी और से शादी कर दो बच्चों👶👶 की अम्मा बन चुकी थी। ऐसी मुश्किल परिस्तिथि में इंजिनीअर ने तय किआ की अब जो भी काम मिले कर लूँगा कम से कम दो वक़्त की रोटी तो नसीब होगी।
तभी बिल्ली 😻के भाग से छींका टुटा और उसे पता चला की सर्कस में एक मेनेजर की जगह खली है। इंजीनिअर को लगा की चाहे जो हो जाये इस नौकरी को हाथ से जाने न दूंगा। उसने इंटरव्यू दिया तो देखा की सर्कस में तो उसके जैसे इंजीनिअर्स की लाइन लगी है, वो ये देख निराश हो गया। सर्कस का मालिक उसकी निराशा समझ गया, वो भला आदमी था उसने इंजीनिअर के कान में कहा की एक नौकरी है, करना चाहो तो दो वक़्त के खाने और 3 हजार रूपये महीने पे दे सकता हु। इंजीनिअर इस काम के लिए ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गया और एक वक़्त का भर पेट खाना खाने के बाद मालिक ने उसे अपने कमरे में बुलाया और बन्दर🙊 की ड्रेस देकर कहा - इसे पहन लो और किसी पेड़ की डाली में चढ़ कर बैठ जाओ, जब लोग आये तो उन्हें तरह तरह के करतब दिखाओ, अपनी हरकतों से उन्हें हँसाओ...
इंजीनिअर ने चुपचाप बन्दर की ड्रेस पहन ली और पेड़ पर चढ़ कर लोगो का मनोरंजन करने लगा। बहुत से लोग आते, उसे देखते और खुश होते। कुछ उसे केला देते तो कुछ मूंगफलियां खिलाते। कुछ इतने कमीने होते की उसे पत्थर मारते, चिढ़ाते, उस पर थूकते।
एक दिन सर्कस देखने उसी के कॉलेज के जूनियर्स का ग्रुप आया था। वो उन्हें देख कर बहुत खुश हो गया और सोचा की आज इनका खूब मनोरंजन करूँगा। लेकिन ये नए नवेले इंजीनिअर्स बहुत हरामी थे, ये बन्दर को परेशान करने लगे। कोई उसकी पूँछ खींचने लगा तो कोई पत्थर मारने लगा और इसी खींचतान में बन्दर शेर 😸के बाड़े में गिर गया।
बन्दर ने शेर को देखा और शेर ने बन्दर को, लोगो ने बागड़ के बाहर से दोनों को देखा। बन्दर की ड्रेस गीली हो गयी और दर्शको को पसीना छूटने लगा। बन्दर भगवान् से प्रार्थना करने लगा, उसे लगा की उसका आखिरी समय आ गया है। शेर आराम से बन्दर के पास आया और उसे सूंघने लगा, दर्शको की आँखों में आंसू आ गए। बन्दर 🙈ने दर के मारे आँखे बंद कर ली और हनुमान चलिषा का पाठ करने लगा।
अचानक बन्दर 🙉के कानो में शेर 😸की आवाज़ गूंजी - अबे गुप्ता घबरा मत, मैं हूँ तेरा सीनियर, सुमित त्रिवेदी 2009 बैच... मैकेनिकल ब्रांच....
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